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Tuesday, 10 December 2019

भारतीय रेलवे तथा अर्थव्यवस्था की कायापलट करने को तैयार है DFCCIL

यदि आप भारतीय नागरिक हैं और यदि DFCCIL के बारे में आपको नहीं पता है तो आप भारत निर्माण(Make in India) के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं,
इसलिए DFCCIL के बारे में जान लेना प्रत्येक भारतीय के लिए बेहद जरूरी है,

इस समय भारतीय रेल लाइनों पर अत्यधिक दबाव है क्योंकि हर रोज 30 लाख टन से ज्यादा माल एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है तथा 2.30 लाख लोग रोज सफर करते हैं, भारतीय रेलवे सिंगल मैनेजमेंट के अंतर्गत होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है, इसके बावजूद भी सड़क यातायात का तीव्र विकास के कारण भारतीय रेल की हिस्सेदारी माल ढुलाई में लगातार घट रही है, 

जहां 1950-51 में जहां भारतीय रेलवे कुल माल ढुलाई का 86% हिस्सेदारी थी जो 2011 में 36% रह गई इन्हीं सब को ध्यान में रखकर भारतीय रेलवे ने समर्पित माल गलियारे यानी डीएफसीसीआईएल के गठन का फैसला लिया, मकसद था यात्री और माल गाड़ियों का संचालन अलग-अलग लाइनों पर करना, 30 अक्टूबर 2006 को एक अहम फैसले में भारत सरकार ने डीएफसीसीआईएल(DFCCIL) डेडीकेटेड फ्रेट कोरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की स्थापना की,

पहले चरण में पूर्वी और पश्चिमी दो कॉरिडोर के निर्माण के लिए मंजूरी मिली, जिसकी कुल लंबाई 3350 किलोमीटर से ज्यादा है पूर्वी DFC की लंबाई लगभग 1850 किलोमीटर है यह लुधियाना के सोनवाल से शुरू होकर पंजाब हरियाणा उत्तर प्रदेश बिहार और झारखंड होते हुए पश्चिमी बंगाल में कोलकाता के पास दानकुनी में खत्म होगा,

वहीं पश्चिमी डीएफसी जिसकी कुल लंबाई लगभग 1500 किलोमीटर है उत्तर प्रदेश के दादरी से शुरू होकर हरियाणा राजस्थान गुजरात और महाराष्ट्र से गुजरेगा यह कोरिडोर मुंबई में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर खत्म होगा,

पूर्वी DFC का अधिकांश हिस्सा विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित है जबकि जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी यानी(JICA) जायका पश्चिम DFC को फाइनेंस कर रहा है,
84459 करोड रुपए वाली यह परियोजना देश में चल रही सबसे बड़ी रेल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है, इस लागत में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप वाले सैंक्शन की लागत शामिल नहीं है,

DFCCIL का लक्ष्य....
1- प्रति टन माल ढुलाई की क्षमता 5000 टन से बढ़ाकर 13000 टन करना
2- माल गाड़ी की रफ्तार 75 किलोमीटर प्रतिघंटा से बढ़ाकर 100 किलोमीटर प्रति घंटा करना,
3- अलग-अलग लाइन बनाने से माल गाड़ियों की औसत गति में इजाफा होगा फिलहाल 26 किलोमीटर प्रति घंटा है डीएफसी ने इसका लक्ष्य 70 किलोमीटर प्रतिघंटा रखा है,
4- माल गाड़ी की लंबाई 700 मीटर से बढ़ाकर 1500 मीटर की जाएगी,
5- तथा डबल स्टैक कंटेनर वाली मालगाड़ी चलने से माल ढुलाई की क्षमता भी ज्यादा हो जाएगी तथा पश्चिमी डीएफसी पर डबल स्टैक कंटेनरो का संचालन इलेक्ट्रीफाइड लाइनों पर होगा,
6- अलग-अलग लाइन बनाने से मालगाड़ी का संचालन भी टाइम से हो पाएगा,

रेल लाइनों के दोनों तरफ लॉजिस्टिक पार्क स्थापित की जाएंगी जिसमें पैलेटीज़िंग की पूरी सुविधा होने से माल ढुलाई में सुविधा प्रदान करेगा,डीएफसी में ऐसी कई खास खूबियां होंगे जो भारतीय रेल में पहली बार देखने को मिलेंगी, डीएफसी प्रणाली और रोल ऑन रूल ऑफ़ सेवा को इलेक्ट्रीफाइड क्षेत्रों में उपलब्ध करवाने में मदद करेगी,

केवल माल की ढुलाई ही नहीं DFC अपने नेटवर्क के जरिए ग्राहकों की तमाम लॉजिस्टिक्स जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा कम्युनिटी पाटनरओं के जरिए कोरिडोरो के आसपास मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क तैयार किए जाएंगे, यह लॉजिस्टिक्स पार्क और टर्मिनल पैकेजिंग, रिटेलिंग, लेबलिंग और पैलेटीज़िंग जैसी सुविधाएं भी प्रदान करेगा थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक सर्विस प्रोवाइडरओं के जरिए ग्राहकों तक माल पहुंचाने के लिए शुरुआती और अंतिम पड़ाव पर कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी, डीएफसी का निर्माण इसके पूरे रूट पर औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं लेकर आएगा,


भारत सरकार नई दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा यानी (DMIC) दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और अमृतसर कोलकाता औद्योगिक गलियारा यानी (AKIC) अमृतसर कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की भी योजना बनाई है,


इसके दोनों कोरिडोरो के इर्द-गिर्द के क्षेत्रों का औद्योगिक करण होगा और वहां निवेश पहुंचेगा, इन औद्योगिक गलियारों की योजना तैयार करने में डीएफसी को ही मुख्य आधार बनाया गया है,

DFC भारतीय ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह से बदल कर रख देगा, यह कई फायदे लेकर आएगा जैसे संचालन और रखरखाव की लागत में कमी अधिक कार्यशील लीन आर्गेनाईजेशन,
प्रतिवैगन और प्रति ट्रेन ज्यादा आउटपुट,
ट्रेनों का समयबद संचालन,
रोलिंग स्टॉक का बेहतर इस्तेमाल,
ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक की कुल लागत में कमी,
सबसे किफायती होने के साथ-साथ DFC ट्रांसपोर्ट पर्यावरण के लिए भी सबसे अनुकूल होगा, DFCCIL ने विश्व बैंक की सहायता से ग्रीन हाउस गैसों पर एक स्टडी करवाई है, `ऑनस्टोन यंग` द्वारा की गई इस स्टडी के मुताबिक डीएफसी शुरू होने से पहले 30 वर्षों के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड गैसों के उत्सर्जन में 45 करोड़ 70 लाख टन की कमी आएगी,

DFCCIL ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक गेमचेंजर साबित होगा, दोनों कोरिडोर पर निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है, डीएफसी के निर्माण में 11500 हेक्टर से ज्यादा भूमि की जरूरत है, इसमें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत निर्मित होने वाली सैंक्शन की जमीन शामिल नहीं है, दोनों कोरिडोओ के निर्माण कार्य में आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है,
इनमें से एक है मैकेनाइज्ड ट्रैक लिंक जो भारत में पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है, न्यू ट्रैक कंस्ट्रक्शन मशीन जिसे NTC मशीन भी कहते हैं 1 दिन में लगभग डेढ़ किलोमीटर ट्रैक बिछा सकती है,
इस तरह नई पटरियों की वेल्डिंग के लिए आधुनिक प्लस बट(Flash butt welding machine) वेल्डिंग मशीन इस्तेमाल की जा रही है,
यह मशीन दो पटरियों के सिरों को बखूबी जोड़ती है, जिसे बेहतर weld पाया जा सकता है, और पटरियों की मजबूती भी अधिक होती है,


नियोजित तरीके से योजना को पूरा करने के लिए निर्माण के रूट पर जगह-जगह कास्टिंग यार्ड बनाई जा रही है, पश्चिमी कॉरिडोर पर 'भगेगा' एक ऐसी ही कास्टिंग यार्ड है जो रेवाड़ी इकबालगढ़ सेक्शन के अंतर्गत आता है, यहां पर इस सेक्शन के लिए सीमेंट गलियारों का निर्माण किया जा रहा है इसके अलावा यहां पर रेल अंडर ब्रिजओं के लिए इस्तेमाल होने वाले बॉक्स और गडर की भी कास्टिंग होती है, जो इस क्षेत्र के निर्माण संबंधी जरूरतों को पूरा करती है,
निर्माण कार्यों में शामिल किए जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्वालिटी कंट्रोल लेब में स्ट्रैंथ टेस्ट भी किए जा रहे हैं,

विभिन्न जगहों पर चल रहे कार्यों की प्रगति की निगरानी रखने के लिए भारतीय रेल के इतिहास में पहली बार ड्रोन सर्वे की शुरुआत की गई है, कई उपकरणों और निर्माण कार्यों का इस्तेमाल भारतीय रेल व्यवस्था में पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है, इसे कामयाब बनाने के लिए अनुभवी और समर्पित कर्मचारियों का होना बहुत जरूरी है, अनुभवी मैनपावर को पूरा करने के लिए भारतीय रेल DFCCIL की मदद करती आ रही है, DFC का विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निविदा प्रक्रिया और देश-विदेश में उपलब्ध आधुनिक निर्माण टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण दिया गया है,

डीएफसी भारत रेल समेत सभी योग्य ऑपरेटरों को बिना किसी भेदभाव के अपना ट्रैक इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध करवाएगा, डीएफसी इसके बदले भारतीय रेल या अन्य ऑपरेटर से ट्रैक एक्सेस चार्ज वसूल करेगा,
डीएफसी के आने के बाद भारतीय रेल का कम से कम 70% माल यातायात उस रूट के समानांतर चलने वाली DFC पर चला जाएगा, माल यातायात में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ने में डीएफसी की मुख्य भूमिका होगी,
डबल स्टैक कंटेनर की सुविधा होने से कंटेनर ट्रैफिक की हिस्सेदारी जो अभी 20% है बढ़कर 40 से 45% पहुंचने की उम्मीद है,
डीएफसी पोर्ट व फ्रीडम रूटों को भी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा और इस तरह आयात निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, कई राज्यों में फैली डीएफसी की टीम दोनों कोरीडोरो को शुरू करने के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है, कोरीडोरो की कमीशनिंग सेक्शन दर सेक्शन होगी,
और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप वाले हिस्से को छोड़कर दोनों कोरीडोरो को 2020/22 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, डीएफसी ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर की कायापलट करने और आधुनिक विकास का अग्रदूत बनने के लिए पूरी तरह से तैयार है क्योंकि ट्रांसपोर्ट सेक्टर में होने वाले विकास अर्थव्यवस्था से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है!

इस प्रकार डीएफसी भारतीय अर्थव्यवस्था को पूर्ण रूप से पलट कर रख देगा तथा मेक इन इंडिया में मुख्य भूमिका निभाएगा जो कि हमारे प्रधानमंत्री जी का एक सपना है,

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